Crime & Safety
मंदसौर कलेक्टर के नाम पर साइबर ठगों की बड़ी सेंध; फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर मांगे पैसे, प्रशासन ने दी चेतावनी
13 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला मुख्यालय से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने सीधे जिले के मुखिया यानी कलेक्टर दिलीप कुमार यादव को ही अपना निशाना बना लिया है। शातिर ठगों ने कलेक्टर के नाम और उनकी आधिकारिक तस्वीर का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफाइल (आईडी) तैयार कर ली है। इस फर्जी आईडी के जरिए जिले के कई प्रबुद्ध नागरिकों और अधिकारियों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई और फिर मैसेंजर के माध्यम से रुपयों की मांग शुरू कर दी गई।
जैसे ही यह सनसनीखेज मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और पुलिस की साइबर सेल को अलर्ट किया गया है। आईटी एक्सपर्ट्स की मदद से इस फर्जी अकाउंट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पुलिस की तकनीकी विंग मामले की गहराई से तफ्तीश में जुट गई है। जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा आमजन से अपील की गई है कि वे इस तरह के किसी भी झांसे में न आएं।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर टीम आरोपी के आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही है ताकि इस गिरोह को जल्द से जल्द दबोचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी शासकीय अधिकारी कभी भी सोशल मीडिया के माध्यम से वित्तीय लेन-देन की बात नहीं करता है। यदि किसी नागरिक के पास ऐसा कोई संदिग्ध संदेश आया हो, तो वे तुरंत स्थानीय थाने या साइबर सेल को इसकी लिखित सूचना दें ताकि धोखाधड़ी पर नकेल कसी जा सके।
जैसे ही यह सनसनीखेज मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और पुलिस की साइबर सेल को अलर्ट किया गया है। आईटी एक्सपर्ट्स की मदद से इस फर्जी अकाउंट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पुलिस की तकनीकी विंग मामले की गहराई से तफ्तीश में जुट गई है। जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा आमजन से अपील की गई है कि वे इस तरह के किसी भी झांसे में न आएं।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर टीम आरोपी के आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही है ताकि इस गिरोह को जल्द से जल्द दबोचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी शासकीय अधिकारी कभी भी सोशल मीडिया के माध्यम से वित्तीय लेन-देन की बात नहीं करता है। यदि किसी नागरिक के पास ऐसा कोई संदिग्ध संदेश आया हो, तो वे तुरंत स्थानीय थाने या साइबर सेल को इसकी लिखित सूचना दें ताकि धोखाधड़ी पर नकेल कसी जा सके।