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मंदसौर में शिवसेना (यूबीटी) का हल्लाबोल: जिला अस्पताल की बदहाली और किसानों के मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू
13 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर कलेक्ट्रेट परिसर के सामने आज शिवसेना (यूबीटी) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। शिवसेना जिला प्रमुख के नेतृत्व में जुटे आंदोलनकारियों ने नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन पर जनविरोधी नीतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। शिवसैनिकों का साफ कहना है कि जब तक क्षेत्र के अन्नदाताओं और मरीजों की जायज मांगों को पूरा नहीं किया जाता, यह आंदोलन थमेगा नहीं।
धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने जिला अस्पताल की बदहाली पर तीखे बाण चलाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदसौर का मुख्य सरकारी अस्पताल खुद 'बीमार' हो चुका है, जहां न तो समय पर गरीब मरीजों को दवाइयां मिल रही हैं और न ही आपातकालीन सेवाओं में डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र के किसानों की नष्ट हुई सोयाबीन फसलों के मुआवजे और सर्वे की मांग को लेकर भी प्रशासन के उदासीन रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया गया।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल मुस्तैद कर दिया गया है। प्रशासनिक अमला प्रदर्शनकारियों को मनाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन शिवसेना नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे केवल लिखित और ठोस आश्वासन के बाद ही यहां से उठेंगे। कड़ाके की धूप के बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला बुलंद है और वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने जिला अस्पताल की बदहाली पर तीखे बाण चलाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदसौर का मुख्य सरकारी अस्पताल खुद 'बीमार' हो चुका है, जहां न तो समय पर गरीब मरीजों को दवाइयां मिल रही हैं और न ही आपातकालीन सेवाओं में डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र के किसानों की नष्ट हुई सोयाबीन फसलों के मुआवजे और सर्वे की मांग को लेकर भी प्रशासन के उदासीन रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया गया।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल मुस्तैद कर दिया गया है। प्रशासनिक अमला प्रदर्शनकारियों को मनाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन शिवसेना नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे केवल लिखित और ठोस आश्वासन के बाद ही यहां से उठेंगे। कड़ाके की धूप के बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला बुलंद है और वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।