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परंपरा और राष्ट्रभक्ति का संगम: मंदसौर के पशुपतिनाथ और उज्जैन के महाकाल मंदिर में 15 नहीं, 11 अगस्त को ही मन गया आजादी का जश्न, हुआ विशेष दूर्वाभिषेक
14 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के सुप्रसिद्ध शिवना तट स्थित अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर और उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय पर्व पारंपरिक तारीख 15 अगस्त से पहले ही मना लिया गया। पंचांग की अनूठी गणना के अनुसार श्रावण कृष्ण चतुर्दशी के पावन अवसर पर रविवार (11 अगस्त) को दोनों ही प्रमुख देवस्थानों में देश की खुशहाली और तरक्की के लिए भगवान शिव का विशेष दूर्वाभिषेक किया गया। इस अनूठे उत्सव और धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारियों के अनुसार, मंदिर में सालों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए राष्ट्रीय त्योहारों को भी तिथियों के अनुसार ही मनाने का विधान है। इसी कड़ी में भारत की आजादी की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गर्भगृह को तिरंगे के आकर्षक रंगों से सजाया गया। विशेष पूजा-अर्चना के बाद अष्टमुखी शिवलिंग पर दूर्वा (दूब घास) और गंगाजल की अविरल धारा अर्पित कर देश की सीमा की रक्षा कर रहे जवानों की लंबी उम्र और राष्ट्र की समृद्धि की मंगल कामना की गई।
उधर उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा शृंगार किया गया। पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देश की सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां दी गईं। मंदिर परिसर 'हर हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, जिसने श्रद्धालुओं को धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर कर दिया।
पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारियों के अनुसार, मंदिर में सालों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए राष्ट्रीय त्योहारों को भी तिथियों के अनुसार ही मनाने का विधान है। इसी कड़ी में भारत की आजादी की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गर्भगृह को तिरंगे के आकर्षक रंगों से सजाया गया। विशेष पूजा-अर्चना के बाद अष्टमुखी शिवलिंग पर दूर्वा (दूब घास) और गंगाजल की अविरल धारा अर्पित कर देश की सीमा की रक्षा कर रहे जवानों की लंबी उम्र और राष्ट्र की समृद्धि की मंगल कामना की गई।
उधर उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा शृंगार किया गया। पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देश की सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां दी गईं। मंदिर परिसर 'हर हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, जिसने श्रद्धालुओं को धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर कर दिया।