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पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध: अब बाहर से ही होंगे बाबा के दर्शन, श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक
18 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर की जीवनदायिनी शिवना नदी के तट पर विराजमान विश्वप्रसिद्ध भगवान अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। मंदिर प्रबंध समिति के आदेशानुसार अब गर्भगृह के भीतर आम श्रद्धालुओं के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस रोक के बाद अब श्रद्धालु केवल गर्भगृह के बाहर से ही भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन लाभ ले सकेंगे और वहीं से जलाभिषेक व रुद्राभिषेक संपन्न करेंगे।
प्रशासनिक फैसले के पहले ही दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पुलिस बल और मंदिर के सेवादार पूरी तरह मुस्तैद रहे। गर्भगृह के बाहर विशेष तांबे के पात्र (पाइप) लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किया गया जल सीधे भगवान के विग्रह तक पहुंच रहा है। भक्तों ने कतारों में लगकर बेहद संयम के साथ बाहर से ही बाबा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, आगामी पर्वों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर गर्भगृह की सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य था। हालांकि गर्भगृह में प्रवेश न मिलने से कुछ श्रद्धालुओं में आंशिक निराशा जरूर दिखी, लेकिन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अधिकांश भक्तों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है और पूरा सहयोग कर रहे हैं।
प्रशासनिक फैसले के पहले ही दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पुलिस बल और मंदिर के सेवादार पूरी तरह मुस्तैद रहे। गर्भगृह के बाहर विशेष तांबे के पात्र (पाइप) लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किया गया जल सीधे भगवान के विग्रह तक पहुंच रहा है। भक्तों ने कतारों में लगकर बेहद संयम के साथ बाहर से ही बाबा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, आगामी पर्वों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर गर्भगृह की सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य था। हालांकि गर्भगृह में प्रवेश न मिलने से कुछ श्रद्धालुओं में आंशिक निराशा जरूर दिखी, लेकिन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अधिकांश भक्तों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है और पूरा सहयोग कर रहे हैं।