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महिलाओं में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए बड़ा कदम: मंदसौर में तीन जिलों के 35 सीएचओ को मिला सर्वाइकल कैंसर जांच का कड़ा प्रशिक्षण
20 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला अस्पताल परिसर स्थित स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को साइलेंट किलर कहे जाने वाले सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस तीन दिवसीय सघन प्रशिक्षण शिविर में मंदसौर, नीमच और उज्जैन जिले के 35 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों की देखरेख में आयोजित इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में तैनात इन स्वास्थ्य अधिकारियों को कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग और संदिग्ध मरीजों की पहचान कर समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर करने में दक्ष बनाना है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञों और कैंसर विशेषज्ञों ने सीएचओ को विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड (VIA) जैसी आधुनिक और सरल स्क्रीनिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। चिकित्सकों ने जोर देकर कहा कि सर्वाइकल कैंसर का यदि शुरुआती स्टेज में पता चल जाए, तो इसका शत-प्रतिशत इलाज संभव है। इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों को ओपीडी स्तर पर ही महिलाओं को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने और उनकी झिझक दूर कर जांच के लिए प्रेरित करने के गुर भी सिखाए गए।
इस पहल से अब ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को जांच के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनिंग पाकर लौटे ये सीएचओ अपने-अपने उप-स्वास्थ्य केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) पर मुस्तैदी से इस स्क्रीनिंग अभियान को आगे बढ़ाएंगे। जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने बताया कि इस अभियान के जरिए ग्रामीण इलाकों में कैंसर के खिलाफ सुरक्षा चक्र को और मजबूत किया जाएगा, ताकि शुरुआती दौर में ही मरीजों को चिन्हित कर उनका जीवन बचाया जा सके।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञों और कैंसर विशेषज्ञों ने सीएचओ को विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड (VIA) जैसी आधुनिक और सरल स्क्रीनिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। चिकित्सकों ने जोर देकर कहा कि सर्वाइकल कैंसर का यदि शुरुआती स्टेज में पता चल जाए, तो इसका शत-प्रतिशत इलाज संभव है। इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों को ओपीडी स्तर पर ही महिलाओं को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने और उनकी झिझक दूर कर जांच के लिए प्रेरित करने के गुर भी सिखाए गए।
इस पहल से अब ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को जांच के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनिंग पाकर लौटे ये सीएचओ अपने-अपने उप-स्वास्थ्य केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) पर मुस्तैदी से इस स्क्रीनिंग अभियान को आगे बढ़ाएंगे। जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने बताया कि इस अभियान के जरिए ग्रामीण इलाकों में कैंसर के खिलाफ सुरक्षा चक्र को और मजबूत किया जाएगा, ताकि शुरुआती दौर में ही मरीजों को चिन्हित कर उनका जीवन बचाया जा सके।