Agriculture & Mandi
मुआवजे और फसल बीमा पर बनी सहमति: प्रशासनिक आश्वासन के बाद किसानों ने खत्म किया कलेक्ट्रेट पर धरना
20 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी मांगों को लेकर डटे किसानों और जिला प्रशासन के बीच आखिरकार सहमति बन गई। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और कृषि विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में हुई मैराथन बैठक के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त करने का ऐलान किया। प्रशासन ने पीड़ित किसानों को आश्वस्त किया है कि फसल नुकसान का त्वरित सर्वे कराकर बीमा राशि और राहत पैकेज के वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
विदित हो कि मालवा क्षेत्र में बेमौसम बारिश और कीटों के प्रकोप से सोयाबीन तथा अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। उचित मुआवजा और बीमा क्लेम न मिलने से आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया था। आंदोलनकारियों का साफ कहना था कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीर रुख नहीं अपनाता, वे धरना स्थल से टस से मस नहीं होंगे। किसानों की इस मुस्तैदी और तीखे तेवरों के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा।
वार्ता के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने लिखित में भरोसा दिलाया कि आगामी दस दिनों के भीतर प्रभावित क्षेत्रों की सर्वे रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ स्तर पर भेज दी जाएगी ताकि बीमा क्लेम का भुगतान जल्द सुनिश्चित हो सके। इस आश्वासन के बाद किसान नेताओं ने कलेक्ट्रेट मार्ग से धरना हटा लिया, लेकिन साथ ही चेताया कि यदि तय समय-सीमा में वादे पूरे नहीं किए गए तो वे दोबारा उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
विदित हो कि मालवा क्षेत्र में बेमौसम बारिश और कीटों के प्रकोप से सोयाबीन तथा अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। उचित मुआवजा और बीमा क्लेम न मिलने से आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया था। आंदोलनकारियों का साफ कहना था कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीर रुख नहीं अपनाता, वे धरना स्थल से टस से मस नहीं होंगे। किसानों की इस मुस्तैदी और तीखे तेवरों के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा।
वार्ता के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने लिखित में भरोसा दिलाया कि आगामी दस दिनों के भीतर प्रभावित क्षेत्रों की सर्वे रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ स्तर पर भेज दी जाएगी ताकि बीमा क्लेम का भुगतान जल्द सुनिश्चित हो सके। इस आश्वासन के बाद किसान नेताओं ने कलेक्ट्रेट मार्ग से धरना हटा लिया, लेकिन साथ ही चेताया कि यदि तय समय-सीमा में वादे पूरे नहीं किए गए तो वे दोबारा उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।