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सांदीपनि स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता: खाली बसें सामने से भर रहीं फर्राटा और मासूम 6 किमी पैदल चलने को मजबूर
20 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर बाईपास स्थित सांदीपनि स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। यहाँ पढ़ने वाले मासूम बच्चे रोजाना धूल भरे रास्तों पर करीब 6 किलोमीटर का सफर पैदल तय करने को मजबूर हैं। हैरत की बात यह है कि बच्चों के सामने से ही स्कूल की खाली बसें फर्राटा भरते हुए निकल जाती हैं, लेकिन उन्हें बैठाने की जहमत कोई नहीं उठाता। परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता नजर आया।
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि भारी-भरकम फीस और बस किराया वसूलने के बावजूद बच्चों को यह प्रताड़ना दी जा रही है। इस मामले को लेकर आक्रोशित पालकों ने चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन मुस्तैद नहीं हुआ और बच्चों के लिए बस की सुविधा बहाल नहीं की गई, तो वे स्कूल मुख्य द्वार पर तालाबंदी करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम पर जिला शिक्षा अधिकारी और परिवहन विभाग की चुप्पी भी संदेहास्पद है। नियमों के मुताबिक स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सुगम परिवहन सुनिश्चित करना प्रशासन का काम है, लेकिन यहाँ सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 'हेलो मंदसौर' की टीम ने जब इस गंभीर मुद्दे को उठाया, तब कहीं जाकर प्रशासनिक हलकों में थोड़ी हलचल शुरू हुई है। देखना होगा कि इन नौनिहालों को इस मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से कब तक निजात मिलती है।
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि भारी-भरकम फीस और बस किराया वसूलने के बावजूद बच्चों को यह प्रताड़ना दी जा रही है। इस मामले को लेकर आक्रोशित पालकों ने चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन मुस्तैद नहीं हुआ और बच्चों के लिए बस की सुविधा बहाल नहीं की गई, तो वे स्कूल मुख्य द्वार पर तालाबंदी करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम पर जिला शिक्षा अधिकारी और परिवहन विभाग की चुप्पी भी संदेहास्पद है। नियमों के मुताबिक स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सुगम परिवहन सुनिश्चित करना प्रशासन का काम है, लेकिन यहाँ सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 'हेलो मंदसौर' की टीम ने जब इस गंभीर मुद्दे को उठाया, तब कहीं जाकर प्रशासनिक हलकों में थोड़ी हलचल शुरू हुई है। देखना होगा कि इन नौनिहालों को इस मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से कब तक निजात मिलती है।