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मंदसौर में आस्था का सैलाब: सावन के तीसरे सोमवार पर पशुपतिनाथ मंदिर में उमड़ी भारी भीड़, शाम को ठाठ-बाठ से निकलेगी बाबा की शाही पालकी
20 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
शिवना नदी के तट पर विराजमान भगवान अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को लेकर अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा है। तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलते ही 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। मंदसौर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
पर्व की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग ने दर्शनार्थियों के लिए विशेष सुगम मार्ग और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है। गर्भ गृह में जलाभिषेक और दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। दोपहर में भगवान का विशेष आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा, जिसे लेकर भक्तों में खासा उत्साह है। श्रद्धालुओं की सुविधा और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
आज शाम को पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से भगवान की भव्य शाही पालकी सवारी निकाली जाएगी। यह पारंपरिक सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरेगी, जहां जगह-जगह पर फूलों की वर्षा और महाआरती के साथ बाबा का स्वागत किया जाएगा। पालकी यात्रा के स्वागत के लिए पूरे शहर को तोरण द्वारों और भगवा ध्वजों से सजाया गया है। स्थानीय भजन मंडलियां और अखाड़े इस भव्य यात्रा में अपनी प्रस्तुतियां देकर समां बांधेंगे।
पर्व की संवेदनशीलता को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग ने दर्शनार्थियों के लिए विशेष सुगम मार्ग और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है। गर्भ गृह में जलाभिषेक और दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। दोपहर में भगवान का विशेष आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा, जिसे लेकर भक्तों में खासा उत्साह है। श्रद्धालुओं की सुविधा और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
आज शाम को पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से भगवान की भव्य शाही पालकी सवारी निकाली जाएगी। यह पारंपरिक सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरेगी, जहां जगह-जगह पर फूलों की वर्षा और महाआरती के साथ बाबा का स्वागत किया जाएगा। पालकी यात्रा के स्वागत के लिए पूरे शहर को तोरण द्वारों और भगवा ध्वजों से सजाया गया है। स्थानीय भजन मंडलियां और अखाड़े इस भव्य यात्रा में अपनी प्रस्तुतियां देकर समां बांधेंगे।