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समानता और सामाजिक समरसता ही संत रविदास को सच्ची श्रद्धांजलि: मंदसौर में गूंजा भाईचारे का संदेश
20 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के स्थानीय मांगलिक परिसर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य संगोष्ठी में प्रबुद्धजनों ने समाज में समानता और समरसता की अलख जगाई। कार्यक्रम की शुरुआत संत रविदास के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विचार गोष्ठी में जुटे वक्ताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि समाज से जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों को हमेशा के लिए उखाड़ फेंकना ही संत रविदास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि जब तक हम ऊंच-नीच के संकीर्ण दायरे से ऊपर नहीं उठेंगे, तब तक एक सशक्त और अखंड राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। संत रविदास ने जीवनभर बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा की और समतावादी समाज की वकालत की। इस अवसर पर मंदसौर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और आपसी भाईचारे व सौहार्द को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का संकल्प लिया।
समारोह के समापन सत्र में उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों को सम्मानित भी किया गया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए हर वर्ष इस तरह के वैचारिक मंथन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि युवा पीढ़ी को संतों के मानवतावादी विचारों और आदर्शों से लगातार जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि जब तक हम ऊंच-नीच के संकीर्ण दायरे से ऊपर नहीं उठेंगे, तब तक एक सशक्त और अखंड राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। संत रविदास ने जीवनभर बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा की और समतावादी समाज की वकालत की। इस अवसर पर मंदसौर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और आपसी भाईचारे व सौहार्द को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का संकल्प लिया।
समारोह के समापन सत्र में उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों को सम्मानित भी किया गया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए हर वर्ष इस तरह के वैचारिक मंथन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि युवा पीढ़ी को संतों के मानवतावादी विचारों और आदर्शों से लगातार जोड़ा जा सके।