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'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजा गरोठ-शामगढ़, धर्मराजेश्वर जलाभिषेक के लिए रवाना हुए सैकड़ों कांवड़िए
21 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
गरोठ-शामगढ़ और आसपास के ग्रामीण अंचलों में सावन मास के चलते शिव भक्ति का उल्लास चरम पर पहुंच गया है। सोमवार सुबह से ही केसरिया बाना पहने शिव भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। हाथों में गंगाजल की कांवड़ थामे सैकड़ों की संख्या में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर भगवान धर्मराजेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए कूच कर गए। पूरा मार्ग 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
यात्रा की शुरुआत के दौरान स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कांवड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा और आरती उतारकर आत्मीय स्वागत किया। डीजे की थाप और शिव भजनों पर झूमते श्रद्धालुओं के उत्साह के आगे सावन की रिमझिम फुहारें भी हल्की नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा और कांवड़ मार्ग पर यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।
मालवा के मिनी एलोरा कहे जाने वाले धर्मराजेश्वर मंदिर में इस कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र की सुख, समृद्धि और अच्छी बारिश की कामना को लेकर हर वर्ष यह सामूहिक यात्रा निकाली जाती है। रास्ते में जगह-जगह सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कांवड़ियों के विश्राम, फलाहार और पेयजल के लिए सेवा स्टॉल लगाए गए, जो सांप्रदायिक सौहार्द और सेवा भावना की जीती-जागती मिसाल पेश कर रहे थे।
यात्रा की शुरुआत के दौरान स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कांवड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा और आरती उतारकर आत्मीय स्वागत किया। डीजे की थाप और शिव भजनों पर झूमते श्रद्धालुओं के उत्साह के आगे सावन की रिमझिम फुहारें भी हल्की नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा और कांवड़ मार्ग पर यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।
मालवा के मिनी एलोरा कहे जाने वाले धर्मराजेश्वर मंदिर में इस कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र की सुख, समृद्धि और अच्छी बारिश की कामना को लेकर हर वर्ष यह सामूहिक यात्रा निकाली जाती है। रास्ते में जगह-जगह सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कांवड़ियों के विश्राम, फलाहार और पेयजल के लिए सेवा स्टॉल लगाए गए, जो सांप्रदायिक सौहार्द और सेवा भावना की जीती-जागती मिसाल पेश कर रहे थे।