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मंदसौर: जेएन कॉलेज में फीस दोगुनी करने पर भड़के छात्र, परिसर में जोरदार नारेबाजी कर सौंपा ज्ञापन
21 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के संजीत मार्ग स्थित जवाहरलाल नेहरू विधि महाविद्यालय (जेएन लॉ कॉलेज) में फीस वृद्धि को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कॉलेज प्रबंधन द्वारा अचानक शैक्षणिक सत्र की फीस 13 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 25 हजार रुपये किए जाने के फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र लामबंद हो गए। आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी की और प्राचार्य कक्ष का घेराव कर प्रबंधन के इस तानाशाही रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया।
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि कोरोना काल के बाद से आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है, ऐसे में फीस को सीधे दोगुना करना गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। कई छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पार्ट-टाइम काम करते हैं। इस बेतहाशा बढ़ोतरी से कई मेधावी छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है। छात्रों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि बढ़ी हुई फीस तुरंत वापस नहीं ली गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।
इस पूरे मामले पर जब कॉलेज प्राचार्य से बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि फीस का निर्धारण उच्च स्तर पर प्रबंधन समिति द्वारा किया जाता है। उन्होंने सरकारी नियमों और बुनियादी सुविधाओं के विकास का हवाला देते हुए इस वृद्धि को जायज ठहराने की कोशिश की। हालांकि, छात्रों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि वे छात्रों की मांग को प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। फिलहाल स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि कोरोना काल के बाद से आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है, ऐसे में फीस को सीधे दोगुना करना गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। कई छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पार्ट-टाइम काम करते हैं। इस बेतहाशा बढ़ोतरी से कई मेधावी छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है। छात्रों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि बढ़ी हुई फीस तुरंत वापस नहीं ली गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।
इस पूरे मामले पर जब कॉलेज प्राचार्य से बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि फीस का निर्धारण उच्च स्तर पर प्रबंधन समिति द्वारा किया जाता है। उन्होंने सरकारी नियमों और बुनियादी सुविधाओं के विकास का हवाला देते हुए इस वृद्धि को जायज ठहराने की कोशिश की। हालांकि, छात्रों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि वे छात्रों की मांग को प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। फिलहाल स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।