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महाकाल की तर्ज पर रोशनी से नहाया पशुपतिनाथ दरबार: बिजली बंद कर सिर्फ दीपों की लौ में हुई बाबा की अलौकिक शयन आरती
24 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के शिवना तट पर स्थित विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में रविवार रात को काशी-विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर भव्य दीप ज्योति शयन आरती का आयोजन किया गया। इस विशेष अनुष्ठान के दौरान गर्भगृह की सभी आधुनिक लाइटें पूरी तरह बंद कर दी गईं, जिससे पूरा गर्भगृह केवल मिट्टी के दीयों की पारंपरिक और अलौकिक रोशनी से जगमगा उठा। बाबा पशुपतिनाथ का यह भव्य और शांत रूप देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए।
मंदिर प्रबंधन और पुजारियों के अनुसार, श्रावण-भादौ मास के विशेष पर्व पर भगवान पशुपतिनाथ के दरबार को हजारों दीपकों से सजाया गया था। शयन आरती के समय जैसे ही मुख्य गर्भगृह की बिजली बंद की गई, वैसे ही महाकाल की तर्ज पर शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच केवल दीप ज्योति की लौ में बाबा के आठों मुखों का अलौकिक तेज निखर उठा। इस अद्भुत और विहंगम नजारे को अपनी आंखों में बसाने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
शिवना मैया की गोद में बसे इस ऐतिहासिक धाम में पहली बार इस तरह का अनूठा प्रयोग किया गया है, जिसने काशी और उज्जैन की तर्ज पर मंदसौर को भी एक नई धार्मिक भव्यता का अहसास कराया है। पशुपतिनाथ मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि आने वाले समय में विशेष त्योहारों और पर्वों पर इस तरह की पारंपरिक दीप आरती की परंपरा को निरंतर जारी रखने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय पर्यटन और आस्था को और अधिक बढ़ावा मिले।
मंदिर प्रबंधन और पुजारियों के अनुसार, श्रावण-भादौ मास के विशेष पर्व पर भगवान पशुपतिनाथ के दरबार को हजारों दीपकों से सजाया गया था। शयन आरती के समय जैसे ही मुख्य गर्भगृह की बिजली बंद की गई, वैसे ही महाकाल की तर्ज पर शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच केवल दीप ज्योति की लौ में बाबा के आठों मुखों का अलौकिक तेज निखर उठा। इस अद्भुत और विहंगम नजारे को अपनी आंखों में बसाने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
शिवना मैया की गोद में बसे इस ऐतिहासिक धाम में पहली बार इस तरह का अनूठा प्रयोग किया गया है, जिसने काशी और उज्जैन की तर्ज पर मंदसौर को भी एक नई धार्मिक भव्यता का अहसास कराया है। पशुपतिनाथ मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि आने वाले समय में विशेष त्योहारों और पर्वों पर इस तरह की पारंपरिक दीप आरती की परंपरा को निरंतर जारी रखने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय पर्यटन और आस्था को और अधिक बढ़ावा मिले।