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अष्टमुखी पशुपतिनाथ दरबार में दीपकों का दिव्य उजाला: बिजली बंद कर उतारी गई बाबा की भव्य शयन आरती, उमड़ा आस्था का सैलाब
25 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के शिवना तट पर स्थित विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर बुधवार रात 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर प्रबंध समिति और स्थानीय भक्तों के विशेष सहयोग से इस बार बाबा पशुपतिनाथ की अलौकिक शयन आरती का आयोजन किया गया। इस महा-आरती की सबसे खास बात यह रही कि आरती शुरू होने से ठीक पहले मंदिर की तमाम कृत्रिम बिजली बत्तियों को पूरी तरह बंद कर दिया गया और पूरा परिसर केवल पारंपरिक मिट्टी के दीयों की रोशनी से जगमगा उठा।
इस मनोहारी दृश्य को अपनी आंखों में बसाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में डटे रहे। गर्भगृह से लेकर मुख्य द्वार तक केवल दीपकों की कतारें और उनकी दिव्य लौ दिखाई दे रही थी। जैसे ही मुख्य पुजारी ने कपूर और घी के महादीपकों से बाबा की शयन आरती शुरू की, शंखध्वनि, डमरू की थाप और घंटियों की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने एक सुर में बाबा की आरती गाकर धर्म लाभ लिया।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस बल मुस्तैद दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शिवना नदी घाट और मुख्य मंदिर मार्ग पर विशेष बैरिकेडिंग की गई थी। दर्शनार्थियों का तांता देर रात तक लगा रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस अलौकिक आयोजन ने उज्जैन के महाकाल दरबार की याद दिला दी, जिसने हर सनातन धर्मी का मन मोह लिया।
इस मनोहारी दृश्य को अपनी आंखों में बसाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में डटे रहे। गर्भगृह से लेकर मुख्य द्वार तक केवल दीपकों की कतारें और उनकी दिव्य लौ दिखाई दे रही थी। जैसे ही मुख्य पुजारी ने कपूर और घी के महादीपकों से बाबा की शयन आरती शुरू की, शंखध्वनि, डमरू की थाप और घंटियों की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने एक सुर में बाबा की आरती गाकर धर्म लाभ लिया।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस बल मुस्तैद दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शिवना नदी घाट और मुख्य मंदिर मार्ग पर विशेष बैरिकेडिंग की गई थी। दर्शनार्थियों का तांता देर रात तक लगा रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस अलौकिक आयोजन ने उज्जैन के महाकाल दरबार की याद दिला दी, जिसने हर सनातन धर्मी का मन मोह लिया।