Weather & Nature
मंदसौर में सूखे के बाद झमाझम बारिश से बदला मौसम का मिजाज, फसलों को मिला जीवनदान; आंकड़ों में अब भी पिछले साल से पीछे
25 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में बीते एक सप्ताह से जारी उमस और तेज धूप के बाद बुधवार को अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में छाए घने काले बादलों के साथ शुरू हुई झमाझम बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। इस बारिश से न केवल तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, बल्कि खेतों में मुरझा रही सोयाबीन की फसलों को संजीवनी मिल गई है, जिससे अन्नदाताओं के चेहरे खिल उठे हैं।
भू-अभिलेख कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मंदसौर जिले में चालू मानसून सीजन में अब तक कुल 20.37 इंच औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में चिंताजनक है। बीते वर्ष आज की तारीख तक जिले में करीब 23.87 इंच बारिश हो चुकी थी, जो कि इस साल की तुलना में लगभग 3.5 इंच अधिक थी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में बारिश का यही दौर जारी रहा, तो पानी की यह कमी जल्द ही पूरी हो जाएगी।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से मालवांचल में मानसून की गतिविधियां तेज हुई हैं। स्थानीय मौसम वैज्ञानिकों ने आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर जिले के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने भी नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कोटवारों और आपदा प्रबंधन टीम को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
भू-अभिलेख कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मंदसौर जिले में चालू मानसून सीजन में अब तक कुल 20.37 इंच औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में चिंताजनक है। बीते वर्ष आज की तारीख तक जिले में करीब 23.87 इंच बारिश हो चुकी थी, जो कि इस साल की तुलना में लगभग 3.5 इंच अधिक थी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में बारिश का यही दौर जारी रहा, तो पानी की यह कमी जल्द ही पूरी हो जाएगी।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से मालवांचल में मानसून की गतिविधियां तेज हुई हैं। स्थानीय मौसम वैज्ञानिकों ने आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर जिले के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने भी नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कोटवारों और आपदा प्रबंधन टीम को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।