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बागड़ी का खेड़ा में महाभियान: मियावाकी पद्धति से रोपे 5100 पौधे, चहकेगा पक्षियों का आशियाना
27 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के समीपवर्ती ग्राम बागड़ी का खेड़ा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अनूठी और सराहनीय पहल सामने आई है। ग्राम पंचायत और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों की मुस्तैदी से जापानी तकनीक 'मियावाकी' पद्धति का उपयोग करते हुए एक साथ 5100 पौधों का रोपण किया गया। इस महाभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तेजी से घटते वन क्षेत्र को पुनर्जीवित करना और बंजर पड़ी शासकीय भूमि को सघन जंगल में तब्दील करना है।
इस पौधारोपण अभियान में पारंपरिक तरीकों से हटकर मियावाकी तकनीक को अपनाया गया है, जिससे पौधे सामान्य की तुलना में दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और तीस गुना अधिक सघन होते हैं। वन विभाग के दिशा-निर्देशन में रोपे गए पौधों में बरगद, पीपल, नीम, जामुन और महुआ जैसी स्थानीय औषधीय व छायादार प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक आशियाना बन सके।
अभियान के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों ने मिलकर जीतोड़ श्रमदान किया। मौके पर मौजूद वन अधिकारियों ने बताया कि इस मियावाकी जंगल की देखरेख के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसमें ट्री-गार्ड और नियमित सिंचाई की व्यवस्था शामिल है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया है कि वे इन पौधों के बड़ा होने तक इनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ हवा मिल सके।
इस पौधारोपण अभियान में पारंपरिक तरीकों से हटकर मियावाकी तकनीक को अपनाया गया है, जिससे पौधे सामान्य की तुलना में दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और तीस गुना अधिक सघन होते हैं। वन विभाग के दिशा-निर्देशन में रोपे गए पौधों में बरगद, पीपल, नीम, जामुन और महुआ जैसी स्थानीय औषधीय व छायादार प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक आशियाना बन सके।
अभियान के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों ने मिलकर जीतोड़ श्रमदान किया। मौके पर मौजूद वन अधिकारियों ने बताया कि इस मियावाकी जंगल की देखरेख के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसमें ट्री-गार्ड और नियमित सिंचाई की व्यवस्था शामिल है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया है कि वे इन पौधों के बड़ा होने तक इनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ हवा मिल सके।