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कौमी एकता की मिसाल: मंदसौर में 60 सालों से मुस्लिम भाई की कलाई पर सज रही हिंदू बहन की राखी
28 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी खूबसूरत तस्वीर हर साल रक्षाबंधन पर देखने को मिलती है, जो आधुनिक समाज के लिए एक बड़ी नजीर बन चुकी है। यहाँ रहने वाली हिंदू बहन शकुंतला बाई पिछले 60 वर्षों से अपने मुस्लिम भाई निसार अहमद को रक्षासूत्र बांधती आ रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों के बीच का यह अटूट स्नेह और विश्वास जरा भी कम नहीं हुआ है। वक्त बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन इस चौखट पर आकर मजहब की दीवारें हमेशा ढह गईं।
इस अनूठी परंपरा की शुरुआत तब हुई थी जब शकुंतला बाई और निसार अहमद बचपन में पड़ोसी हुआ करते थे। खेल-कूद में पनपा यह भाई-बहन का रिश्ता आज साठ साल बाद भी उतना ही गहरा है। हर साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शकुंतला पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ निसार के घर पहुंचती हैं, उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र व तरक्की की दुआ मांगते हुए कलाई पर राखी बांधती हैं।
मुस्लिम भाई निसार अहमद भी इस पवित्र रिश्ते की मर्यादा को पूरी शिद्दत से निभाते हैं। निसार का कहना है कि खून के रिश्तों से बढ़कर दिलों के रिश्ते होते हैं और शकुंतला उनकी सगी बहन से भी बढ़कर हैं। त्योहार के दिन निसार का पूरा परिवार शकुंतला बाई का गर्मजोशी से स्वागत करता है और उन्हें उपहार भेंट करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां आज छोटी-छोटी बातों पर समाज में दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं मंदसौर का यह परिवार दिलों को जोड़ने का काम कर रहा है।
इस अनूठी परंपरा की शुरुआत तब हुई थी जब शकुंतला बाई और निसार अहमद बचपन में पड़ोसी हुआ करते थे। खेल-कूद में पनपा यह भाई-बहन का रिश्ता आज साठ साल बाद भी उतना ही गहरा है। हर साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शकुंतला पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ निसार के घर पहुंचती हैं, उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र व तरक्की की दुआ मांगते हुए कलाई पर राखी बांधती हैं।
मुस्लिम भाई निसार अहमद भी इस पवित्र रिश्ते की मर्यादा को पूरी शिद्दत से निभाते हैं। निसार का कहना है कि खून के रिश्तों से बढ़कर दिलों के रिश्ते होते हैं और शकुंतला उनकी सगी बहन से भी बढ़कर हैं। त्योहार के दिन निसार का पूरा परिवार शकुंतला बाई का गर्मजोशी से स्वागत करता है और उन्हें उपहार भेंट करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां आज छोटी-छोटी बातों पर समाज में दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं मंदसौर का यह परिवार दिलों को जोड़ने का काम कर रहा है।