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मंदसौर जिला जेल में पिघला बंदियों का दिल: 800 भाइयों की कलाई पर सजी राखी, बहनों को दिया अपराध से तौबा का वचन
29 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला जेल परिसर में आज उस समय हर आंख नम हो गई, जब रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जेल की सलाखों के पीछे बंद कैदियों से मिलने उनकी बहनें पहुंचीं। जेल अधीक्षक के विशेष दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित इस मिलाई कार्यक्रम में सुबह से ही जेल मुख्य द्वार के बाहर बहनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। जेल प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जहां प्रहरी और मुख्य प्रहरी पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी पर तैनात नजर आए। जेल के भीतर प्रवेश से पहले बहनों की सघन चेकिंग की गई, जिसके बाद उन्हें अपने भाइयों से मिलने की अनुमति दी गई।
जैसे ही बहनों ने सलाखों के पीछे खड़े अपने भाइयों की कलाई पर स्नेह का धागा बांधा, जेल परिसर में चारों तरफ आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस विशेष आयोजन के दौरान कुल 800 बंदियों को उनकी बहनों ने तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधा और मुंह मीठा कराया। इस दौरान जेल की दीवारें भी भाई-बहन के इस अटूट प्रेम और मिलाप की साक्षी बनीं। बहनों ने रोते हुए अपने भाइयों से जेल से रिहा होने के बाद एक अच्छा नागरिक बनने की मिन्नत की। बहनों की इस गुहार पर कई खूंखार बंदियों की आंखें भी छलक उठीं और उन्होंने अपनी बहनों को साक्षी मानकर भविष्य में अपराध और गलत संगति से पूरी तरह तौबा करने का गंभीर संकल्प लिया।
जेल प्रशासन ने इस भावुक मिलाई के दौरान बंदियों और उनके परिजनों के बैठने के लिए विशेष पांडाल और पेयजल की माकूल व्यवस्था की थी। जेल अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के संवेदनशील और पारिवारिक आयोजनों से बंदियों के भीतर पश्चाताप की भावना जागती है और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होते हैं। इस अनोखे और भावुक मिलन के बाद कई बंदियों ने अपनी बहनों को विश्वास दिलाया कि वे जेल की सजा पूरी होने के बाद एक सुधरे हुए इंसान के रूप में घर लौटेंगे और सम्मानजनक जीवन व्यतीत करेंगे।
जैसे ही बहनों ने सलाखों के पीछे खड़े अपने भाइयों की कलाई पर स्नेह का धागा बांधा, जेल परिसर में चारों तरफ आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस विशेष आयोजन के दौरान कुल 800 बंदियों को उनकी बहनों ने तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधा और मुंह मीठा कराया। इस दौरान जेल की दीवारें भी भाई-बहन के इस अटूट प्रेम और मिलाप की साक्षी बनीं। बहनों ने रोते हुए अपने भाइयों से जेल से रिहा होने के बाद एक अच्छा नागरिक बनने की मिन्नत की। बहनों की इस गुहार पर कई खूंखार बंदियों की आंखें भी छलक उठीं और उन्होंने अपनी बहनों को साक्षी मानकर भविष्य में अपराध और गलत संगति से पूरी तरह तौबा करने का गंभीर संकल्प लिया।
जेल प्रशासन ने इस भावुक मिलाई के दौरान बंदियों और उनके परिजनों के बैठने के लिए विशेष पांडाल और पेयजल की माकूल व्यवस्था की थी। जेल अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के संवेदनशील और पारिवारिक आयोजनों से बंदियों के भीतर पश्चाताप की भावना जागती है और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होते हैं। इस अनोखे और भावुक मिलन के बाद कई बंदियों ने अपनी बहनों को विश्वास दिलाया कि वे जेल की सजा पूरी होने के बाद एक सुधरे हुए इंसान के रूप में घर लौटेंगे और सम्मानजनक जीवन व्यतीत करेंगे।