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अटूट आस्था: मायके जयपुर जाना छोड़ा, 19 वर्षों से बाबा पशुपतिनाथ को 12 फीट की राखी बांध रहीं मंदसौर की अर्पणा
30 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के विश्वप्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में आस्था का एक अनोखा रंग देखने को मिल रहा है। नयापुरा क्षेत्र की निवासी अर्पणा शर्मा पिछले 19 वर्षों से अनवरत रूप से बाबा पशुपतिनाथ को अपने हाथों से तैयार की गई 12 फीट लंबी विशेष राखी बांध रही हैं। इस अनूठे संकल्प के चलते अर्पणा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जयपुर स्थित अपने मायके भी नहीं जातीं। उनके लिए बाबा पशुपतिनाथ ही उनके भाई और रक्षक हैं, जिन्हें वे हर वर्ष राखी का पहला धागा समर्पित करती हैं।
इस वर्ष भी अर्पणा इस भव्य राखी को अंतिम रूप देने में पूरी शिद्दत से जुटी हुई हैं। पूरी तरह से सूती धागों, चमकीले गोटे, रंग-बिरंगे मोतियों और पारंपरिक कलाकृतियों से सुसज्जित इस 12 फीट की राखी को तैयार करने में उन्हें कई दिनों की कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। रक्षाबंधन के दिन मंदिर गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना के बाद पंडितों के सानिध्य में यह महा-राखी बाबा के श्रीचरणों में अर्पित की जाएगी, जिसे देखने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहता है।
स्थानीय पुजारियों और भक्तों का कहना है कि अर्पणा का यह निस्वार्थ समर्पण अब मंदसौर की गौरवशाली लोक-संस्कृति और धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। रक्षाबंधन के दिन जब पूरा देश भाई-बहन के प्रेम का उत्सव मनाता है, तब मंदसौर के इस पावन दरबार में अर्पणा की यह अनुपम भेंट पूरी मानव जाति के कल्याण और बाबा के प्रति अटूट विश्वास की गवाही देती है।
इस वर्ष भी अर्पणा इस भव्य राखी को अंतिम रूप देने में पूरी शिद्दत से जुटी हुई हैं। पूरी तरह से सूती धागों, चमकीले गोटे, रंग-बिरंगे मोतियों और पारंपरिक कलाकृतियों से सुसज्जित इस 12 फीट की राखी को तैयार करने में उन्हें कई दिनों की कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। रक्षाबंधन के दिन मंदिर गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना के बाद पंडितों के सानिध्य में यह महा-राखी बाबा के श्रीचरणों में अर्पित की जाएगी, जिसे देखने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहता है।
स्थानीय पुजारियों और भक्तों का कहना है कि अर्पणा का यह निस्वार्थ समर्पण अब मंदसौर की गौरवशाली लोक-संस्कृति और धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। रक्षाबंधन के दिन जब पूरा देश भाई-बहन के प्रेम का उत्सव मनाता है, तब मंदसौर के इस पावन दरबार में अर्पणा की यह अनुपम भेंट पूरी मानव जाति के कल्याण और बाबा के प्रति अटूट विश्वास की गवाही देती है।