Crime & Safety
सीएमएचओ दफ्तर में 'फर्जी नियुक्तियों' का बड़ा खेल: स्वीकृत थे सिर्फ 66 पद, बैकडोर से भर्ती कर दिए 318 आउटसोर्स कर्मी
30 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभाग में आउटसोर्सिंग के नाम पर बड़ा खेल खेलते हुए तत्कालीन अधिकारियों और बाबुओं ने मिलीभगत कर स्वीकृत पदों से पांच गुना अधिक नियुक्तियां कर दीं। प्रशासनिक फाइलों में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, जहां महज 66 पदों पर कर्मचारियों की जरूरत थी, वहीं कागजों पर हेरफेर कर 318 लोगों को नौकरी पर रख लिया गया। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे से लेकर जिला प्रशासन के गलियारों में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए भर्ती एजेंसी और विभाग के रसूखदार अधिकारियों के बीच तगड़ी सांठगांठ की गई थी। बिना किसी विज्ञापन, परीक्षा या पारदर्शी प्रक्रिया के बैकडोर से चहेतों को उपकृत किया गया और हर महीने सरकारी खजाने से लाखों रुपये का चूना लगाया गया। घोटाले की भनक लगते ही अब भोपाल मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों की टीम सक्रिय हो गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस मामले में जल्द ही कई बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।
इधर, इस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल अब पूरे रिकॉर्ड खंगालने में जुट गया है। शुरुआती तफ्तीश में यह भी सामने आया है कि नियुक्त किए गए कई कर्मचारी सिर्फ कागजों पर ही वेतन उठा रहे थे, जबकि धरातल पर वे कभी ड्यूटी पर आए ही नहीं। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मामले की तह तक जाने के लिए बैंक खातों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए भर्ती एजेंसी और विभाग के रसूखदार अधिकारियों के बीच तगड़ी सांठगांठ की गई थी। बिना किसी विज्ञापन, परीक्षा या पारदर्शी प्रक्रिया के बैकडोर से चहेतों को उपकृत किया गया और हर महीने सरकारी खजाने से लाखों रुपये का चूना लगाया गया। घोटाले की भनक लगते ही अब भोपाल मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों की टीम सक्रिय हो गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस मामले में जल्द ही कई बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।
इधर, इस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल अब पूरे रिकॉर्ड खंगालने में जुट गया है। शुरुआती तफ्तीश में यह भी सामने आया है कि नियुक्त किए गए कई कर्मचारी सिर्फ कागजों पर ही वेतन उठा रहे थे, जबकि धरातल पर वे कभी ड्यूटी पर आए ही नहीं। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मामले की तह तक जाने के लिए बैंक खातों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।