Crime & Safety
जमीन हड़पने का बड़ा खेल: पैतृक भूमि का फर्जी नामांतरण कर बेच डाली 4 बीघा जमीन, पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
01 September 2026
•
By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान भू-माफियाओं और जालसाजों का एक बड़ा कारनामा उजागर हुआ है। कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित ने कलेक्टर दिलीप कुमार यादव के समक्ष अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उसकी पैतृक कृषि भूमि पर साठगांठ कर फर्जी नामांतरण करा लिया गया। हद तो तब हो गई जब बिना उसकी जानकारी और सहमति के जालसाजों ने 4 बीघा बेशकीमती जमीन की किसी अन्य के नाम रजिस्ट्री भी करवा दी। पीड़ित ने इस पूरे सिंडिकेट में स्थानीय राजस्व अमले के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत होने की आशंका जताई है।
किसान ने बताया कि यह जमीन उसके पूर्वजों की विरासत है, जिस पर वह और उसका परिवार पीढ़ियों से खेती कर गुजर-बसर कर रहे थे। कुछ दिनों पहले जब वह अपनी फसल के सिलसिले में राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने तहसील दफ्तर पहुंचा, तब उसे इस बड़े फर्जीवाड़े की भनक लगी। जालसाजों ने कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार कर सरकारी फाइलों में हेरफेर किया और रातों-रात जमीन का मालिकाना हक बदल दिया। इस खुलासे के बाद से ही पीड़ित न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट घिसने को मजबूर है।
मामले की संवेदनशीलता और धोखाधड़ी के इस गंभीर तरीके को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार को इस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि जांच में किसी भी पटवारी या राजस्व कर्मी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
किसान ने बताया कि यह जमीन उसके पूर्वजों की विरासत है, जिस पर वह और उसका परिवार पीढ़ियों से खेती कर गुजर-बसर कर रहे थे। कुछ दिनों पहले जब वह अपनी फसल के सिलसिले में राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने तहसील दफ्तर पहुंचा, तब उसे इस बड़े फर्जीवाड़े की भनक लगी। जालसाजों ने कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार कर सरकारी फाइलों में हेरफेर किया और रातों-रात जमीन का मालिकाना हक बदल दिया। इस खुलासे के बाद से ही पीड़ित न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट घिसने को मजबूर है।
मामले की संवेदनशीलता और धोखाधड़ी के इस गंभीर तरीके को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार को इस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि जांच में किसी भी पटवारी या राजस्व कर्मी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मामले की तफ्तीश में जुट गई है।