Crime & Safety
हाथों में तिरंगा और आंखों में इंसाफ की आस: पैतृक जमीन के फर्जीवाड़े के खिलाफ 35 किमी पैदल चल कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण
02 September 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला मुख्यालय पर आज उस समय हड़कंप मच गया जब हाथों में तिरंगा झंडा थामे दर्जनों ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय जा पहुंचे। सीतामऊ तहसील के सुदूर गांव से निकले इन ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी पैतृक कृषि भूमि पर भू-माफियाओं और राजस्व अमले की मिलीभगत से किए गए फर्जी नामांतरण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूर हुए हैं। करीब 35 किलोमीटर का लंबा और पथरीला सफर पैदल तय कर थके-हारे ग्रामीण जिला कलेक्टर के समक्ष अपनी पीड़ा बयां करने पहुंचे थे।
पीड़ित ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए दूसरे रसूखदारों के नाम चढ़ा दिया गया है। जब उन्होंने स्थानीय स्तर पर तहसील कार्यालय के चक्कर काटे, तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया गया और पटवारी से लेकर अन्य जिम्मेदार तमाशबीन बने रहे। स्थानीय प्रशासन की इसी हीलाहवाली से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को अपना संबल बनाया और पैदल ही जिला मुख्यालय की ओर कूच कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस फर्जीवाड़े के दोषियों पर नकेल नहीं कसी गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल मुस्तैद किया गया था। जिला कलेक्टर ने आंदोलनकारी ग्रामीणों की पीड़ा सुनी और तत्काल प्रभाव से संबंधित एसडीएम को मामले की निष्पक्ष तफ्तीश के आदेश जारी किए। प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि राजस्व रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर तीन दिन के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना पैदल मार्च समाप्त किया, लेकिन साफ लहजे में चेताया कि हक मिलने तक उनका संघर्ष थमेगा नहीं।
पीड़ित ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए दूसरे रसूखदारों के नाम चढ़ा दिया गया है। जब उन्होंने स्थानीय स्तर पर तहसील कार्यालय के चक्कर काटे, तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया गया और पटवारी से लेकर अन्य जिम्मेदार तमाशबीन बने रहे। स्थानीय प्रशासन की इसी हीलाहवाली से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को अपना संबल बनाया और पैदल ही जिला मुख्यालय की ओर कूच कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस फर्जीवाड़े के दोषियों पर नकेल नहीं कसी गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल मुस्तैद किया गया था। जिला कलेक्टर ने आंदोलनकारी ग्रामीणों की पीड़ा सुनी और तत्काल प्रभाव से संबंधित एसडीएम को मामले की निष्पक्ष तफ्तीश के आदेश जारी किए। प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि राजस्व रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर तीन दिन के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना पैदल मार्च समाप्त किया, लेकिन साफ लहजे में चेताया कि हक मिलने तक उनका संघर्ष थमेगा नहीं।