Crime & Safety
मंदसौर में आवारा कुत्तों का आतंक: रोजाना 25 लोग हो रहे लहूलुहान, नपा प्रशासन की अनदेखी से जनता में आक्रोश
02 September 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर नगर पालिका क्षेत्र के रिहायशी इलाकों और मुख्य बाजारों में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब लोगों का सड़कों पर अकेले निकलना दूभर हो गया है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में हर दिन औसतन 25 लोग इन आवारा श्वानों के हमले का शिकार होकर इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बावजूद नगर पालिका का अमला पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है, जिससे स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
शहर के रामटेकरी, खानपुरा, संजीत नाका और बस स्टैंड जैसे व्यस्ततम इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड राहगीरों और खासकर मासूम बच्चों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं। हाल ही में कटी घाटी क्षेत्र में ट्यूशन से लौट रहे एक बच्चे को कुत्तों ने नोंच डाला, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल भर्ती कराया गया है। रात के समय ये कुत्ते दुपहिया चालकों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं और सड़कों पर कोहराम मचा हुआ है।
इस ज्वलंत मुद्दे पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) का कहना है कि कुत्तों की नसबंदी और धरपकड़ के लिए जल्द ही एक विशेष मुहिम शुरू की जाएगी। हालांकि, वर्षों से मिल रहे इस रटे-रटाए आश्वासन से तंग आकर अब समाजसेवियों और पीड़ित परिवारों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जनता का साफ कहना है कि अब कागजी दावों के बजाय जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
शहर के रामटेकरी, खानपुरा, संजीत नाका और बस स्टैंड जैसे व्यस्ततम इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड राहगीरों और खासकर मासूम बच्चों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं। हाल ही में कटी घाटी क्षेत्र में ट्यूशन से लौट रहे एक बच्चे को कुत्तों ने नोंच डाला, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल भर्ती कराया गया है। रात के समय ये कुत्ते दुपहिया चालकों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं और सड़कों पर कोहराम मचा हुआ है।
इस ज्वलंत मुद्दे पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) का कहना है कि कुत्तों की नसबंदी और धरपकड़ के लिए जल्द ही एक विशेष मुहिम शुरू की जाएगी। हालांकि, वर्षों से मिल रहे इस रटे-रटाए आश्वासन से तंग आकर अब समाजसेवियों और पीड़ित परिवारों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जनता का साफ कहना है कि अब कागजी दावों के बजाय जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।