Crime & Safety
भ्रष्टाचार और भर्ती घोटाले में मंदसौर CMHO डॉ. गोविंद सिंह चौहान पर गिरी गाज, शासन ने किया निलंबित
04 September 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला चिकित्सालय और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती में बड़ी गड़बड़ी उजागर होने के बाद भोपाल से बड़ी कार्रवाई की गई है। संभागायुक्त के निर्देश और जांच रिपोर्ट के आधार पर मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. गोविंद सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। डॉ. चौहान पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को उपकृत करने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उनके खिलाफ कोतवाली पुलिस में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया गया है।
मामला जिला स्वास्थ्य समिति के तहत आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई भर्तियों में भारी धांधली से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि बिना किसी तय प्रक्रिया और पारदर्शिता के, कथित रूप से भारी लेन-देन कर अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्तियां दी गईं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया।
निलंबन अवधि के दौरान डॉ. चौहान का मुख्यालय लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, भोपाल तय किया गया है। इधर, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें दर्ज एफआईआर के आधार पर पूरे घोटाले की गहराई से तफ्तीश में जुटी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि पुलिसिया पूछताछ में स्वास्थ्य विभाग के कई और रसूखदारों और ठेका एजेंसियों के संचालकों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
मामला जिला स्वास्थ्य समिति के तहत आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई भर्तियों में भारी धांधली से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि बिना किसी तय प्रक्रिया और पारदर्शिता के, कथित रूप से भारी लेन-देन कर अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्तियां दी गईं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया।
निलंबन अवधि के दौरान डॉ. चौहान का मुख्यालय लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, भोपाल तय किया गया है। इधर, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें दर्ज एफआईआर के आधार पर पूरे घोटाले की गहराई से तफ्तीश में जुटी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि पुलिसिया पूछताछ में स्वास्थ्य विभाग के कई और रसूखदारों और ठेका एजेंसियों के संचालकों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।