Crime & Safety
सीएमएचओ दफ्तर बना 'फर्जी नियुक्तियों' की फैक्ट्री: स्वीकृत थे महज 66 पद, बैकडोर से भर्ती कर दिए 318 कर्मचारी
04 September 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में आउटसोर्सिंग के नाम पर बड़े भर्ती फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। नियमों को ताक पर रखकर दफ्तर के भीतर 'फर्जी रोजगार' की समानांतर फैक्ट्री चलाई जा रही थी। विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड और वार्ड बॉय जैसे कुल 66 स्वीकृत पद थे, लेकिन भ्रष्ट अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत का खेल ऐसा चला कि बैकडोर से चुपके से 318 लोगों को ज्वाइनिंग दिला दी गई। इस बड़े खुलासे के बाद जिला प्रशासन से लेकर भोपाल तक के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। बिना किसी विज्ञापन, पात्रता या विभागीय मंजूरी के धड़ाधड़ नियुक्तियां बांटी गईं। हद तो तब हो गई जब स्वीकृत पदों से कई गुना अधिक कर्मचारियों की फर्जी हाजिरी दिखाकर हर महीने सरकारी खजाने से लाखों रुपये का भुगतान भी करा लिया गया। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर हुए इस खेल ने विभागीय ऑडिट की पोल खोलकर रख दी है।
मामला उजागर होने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जांच की भनक लगते ही सीएमएचओ कार्यालय के कई संदिग्ध बाबू और संबंधित आउटसोर्स एजेंसी के कारिंदे भूमिगत हो गए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम अब भर्ती से जुड़े फाइलों और बैंक खातों के दस्तावेजों को खंगालने में जुट गई है। माना जा रहा है कि तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, महकमे के कई बड़े चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। बिना किसी विज्ञापन, पात्रता या विभागीय मंजूरी के धड़ाधड़ नियुक्तियां बांटी गईं। हद तो तब हो गई जब स्वीकृत पदों से कई गुना अधिक कर्मचारियों की फर्जी हाजिरी दिखाकर हर महीने सरकारी खजाने से लाखों रुपये का भुगतान भी करा लिया गया। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर हुए इस खेल ने विभागीय ऑडिट की पोल खोलकर रख दी है।
मामला उजागर होने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जांच की भनक लगते ही सीएमएचओ कार्यालय के कई संदिग्ध बाबू और संबंधित आउटसोर्स एजेंसी के कारिंदे भूमिगत हो गए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम अब भर्ती से जुड़े फाइलों और बैंक खातों के दस्तावेजों को खंगालने में जुट गई है। माना जा रहा है कि तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, महकमे के कई बड़े चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।